प्यार बहुत ही प्यारा होता
है ,जब होता है तो लगता है की दुनिया बहुत
ही खूबसूरत है | प्यार एक एहसास है जिसे आँखें बयां कर
देती हैं | प्यार करने के लिए एक साथी की ज़रुरत होती है,
जिसे प्यार करने के लिए किसी ज़रुरत की ज़रुरत नहीं होती | कहते हैं की जिसके पास प्यार की दौलत होती है वो सबसे ज्यादा अमीर
होता है .... सच्चे मन से जब आप किसी को चाहते है तो आपके अंदर एक अलग उर्जा का
प्रवाह होने लगता हैं, जो आपके साथ रहने
वाले हर व्यक्ति को भी छू जाती है ; हर असंभव काम भी संभव हो जाता है ...ठीक उसी तरह जैसे ईश्वर पर
विश्वास रखने पर आपका मनोबल बढ़ जाता है और
सभी असंभव काम पूरे हो जाते हैं ,क्यूंकि
जिसके मन में प्यार है उसके मन में ईश्वर है | प्यार का रिश्ता सबसे पवित्र रिश्ता है इसलिए इसको सोच समझकर नहीं
किया जाता .....हो जाता है | प्यार जूनून है ,दीवानगी है जिसमे एक दूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की शक्ति होती है
| प्यार ज़िन्दगी है ,इबादत है ,पूजा
है ,अगर आपके पास प्यार है तो उसे संभाल कर रखिये | जिससे आप प्यार करते हैं अगर उससे आपकी हर बात, ख़ास तौर पर आपके शौक
मिलते हो फिर तो बात ही क्या है | आप जानते हैं, की
एक दूसरे के जैसे शौक होने से खाली समय में आप
एक दूसरे की बातों को तवज्जू देते
हैं ,एक साथ हँसते हैं ,एक रोये तो दूसरे की आँखें भर आती हैं ,बिना कुछ कहे आप अपने साथी की बात को समझ सकते हैं ,एक दूसरे का ध्यान रखते हैं ,जिससे आपके बीच समझदारी बढ़ती है ,आपका रिश्ता और मज़बूत होता है | अगर आपकी ज़िन्दगी में कोई ऐसा है तो
उसी को अपना जीवनसाथी चुनें क्यूंकि उतार चढ़ाव तो ज़िन्दगी में आते रहते हैं किन्तु एक सच्चा
साथी बहुत मुश्किल से मिलता है | कहीं कहीं पसंद एक न होने पर भी प्यार और समझदारी इतनी होती है की एक दूसरे की पसंद को ही अपनी पसंद बना लेते हैं ,लेकिन ख़ुशी से बोझ समझकर नहीं | जान लें की आप के अंदर दुनिया से हटकर कोई बात है ,तभी आप के पास प्यार है नहीं तो यह सुख शायद सभी को मिल जाता | कहते हैं प्यार खुशनसीबों को मिलता है | प्यार का साथी जब जीवनसाथी बन जाता है तब भी उस प्यार को कायम रखना
सबसे बड़ी जीत है | जब
आप प्यार में होते हैं तब अपने साथी के अलावा कोई अच्छा नहीं लगता ,तभी अगर परिवारजन कोई कड़वी बात कह देते हैं जो आपके रिश्ते के पक्ष
में न हो तो तकलीफ होती है ;आपके
माँ बाप ;परिवारजन एवं दोस्त हैं ,किसी के कुछ कह लेने से कुछ नहीं होता इसलिए आप अपना प्यार उनके
प्रति भी बरक़रार रखें ,उनका
साथ न छोड़े ,पास हो या दूर प्यार उनसे भी है ,उसको निभाना भी आपका फ़र्ज़ है | क्यूंकि प्यार आपने किया है आपके परिवार ने नहीं इसलिए यह बिलकुल
ज़रूरी नहीं की वे आपके साथी को पसंद करें ;हो सकता है की शादी के लिए हाँ कर दें लेकिन पूरी ज़िन्दगी आपके साथी
से सहमत होना यह ज़रूरी नहीं ,न ही आप को उनसे यह उम्मीद रखनी चाहिए | क्यूंकि कुछ माँ बाप अपने बच्चों की शादी के लिए बड़े बड़े सपने देखते
है ,अपने बच्चे का जीवनसाथी चुनना चाहते
है तो उन्हें तकलीफ होना जायज़ है किन्तु
गलत नहीं ;क्यूंकि हो सकता है आपका परिवार और
उनके संस्कार अलग हो ,जो
आपके साथी से न मिलते हो | इसलिए
उनसे हमेशा सकारात्मक व्यवहार की अपेक्षा न करें | आपका साथी आपकी पसंद है ,आपने ही एक दूसरे को प्यार
किया हैं ;ज़िन्दगी भर एक दूसरे को खुश रखने की
कसम भी आपने ली है इसलिए ज़िम्मेदारी आपकी है की किस तरह एक दूसरे के साथ जीवन
बिताना है ,प्यार
का रिश्ता इतना मज़बूत हो के किसी के कुछ कहने पर आपका धैर्य न टूटे और अपने ही साथी का दिल न तोड़े ,क्यूंकि आप जिससे सबसे ज्यादा प्यार करते हैं तकलीफ भी सबसे ज्यादा
उन्ही की बातों से होती है | इसलिए न दोष परिवार का होता
है न ही आपका | सिर्फ अपने प्यार पर विश्वास रखिये और
उसे निभाइए ,एक दूसरे के आत्मसम्मान को ठेस न
पहुचने दें ,नहीं तो दो प्यार करने वाले कहीं गुम
हो जाते है | जो प्यार करते हैं उनके ऊपर ज़िम्मेदारी
ज्यादा होती है परिवार की एवं साथी की इसलिए सामंजस्य बनाना आपके ऊपर है, परिवार भी आपका साथी भी आपका | आप दोनों को जानते हैं बस अपने मन और मस्तिष्क का सही समय पर ,सही बात के लिए उपयोग करना
आना चाहिए | अगर परिवार जन और सभी लोग आपके रिश्ते
से पूरी तरह सहमत हैं तो ज़िन्दगी और भी खूबसूरत हो जाती है | किन्तु प्यार आपका है ; अपने जूनून को जिंदा रखें
फिर देखिये आपका प्यार आसमान को छू लेगा | एक मिसाल बन जायेगा |
एक इन्सान की ज़िन्दगी शुरू होती है जब वो जन्म लेता है बचपन सबसे प्यारा गुजरता है, क्यूंकि समझ बहुत कम होती है लेकिन कई अच्छी और बुरी बातें याद रह जाती हैं -अधिकतर विकास व्यक्तिव का बचपन में ही हो जाता है , फिर युवावस्था में प्रवेश लेते ही दुनिया बहुत खूबसूरत हो जाती है और सबकुछ या तो बहुत ज्यादा अच्छा लगने लगता है या बहुत ज्यादा बुरा -इस उम्र में हर बात का ज़्यादा मात्रा में होना ज़िन्दगी की रफ़्तार बड़ा देता है , समय कब हाथ से निकल जाता है पता ही नहीं चलता | कुछ युवा इसी अवस्था में भटक जाते है , तो कई को सही राह मिल जाती है , कई अपने भविष्य के लिए तैयार हो जाते है - यह सब आपके मार्गदर्शन , आपके शिक्षक , आपके पालक और सबसे ज्यादा आप पर निर्भर करता है की आपका झुकाव किस तरफ है | क्यूंकि आपका शरीर एक मशीन है जिसके नियंत्रण का बटन आपके मस्तिष्क में है और एक्सेलरेटर आपका दिल है | अब यह आपको ही निर्धारित करना है की करना क्या है ? किन्तु युवा वस्था में कई बार सोचने समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है जिससे सही निर्णय नहीं हो पाते -और यही वो समय होता है जब आपका ...
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